अपनी आध्यात्मिक यात्रा का आरम्भ एक सुदृढ़ नींव से करें
भक्ति योग का परिचयात्मक पाठ्यक्रम:अगर आप हाल ही में कृष्ण भावनामृत के सम्पर्क में आए हैं और इसके दर्शन और अभ्यास को समझना चाहते हैं, तो यह पाठ्यक्रम आपके लिए सर्वोत्तम है। आप इसके द्वारा कृष्ण भगवान्, भगवान् चैतन्य, श्रील प्रभुपाद और भक्ति योग की शाश्वत प्रक्रिया, यानी भक्ति के मार्ग के बारे में जानेंगे। आप कृष्ण भावनामृत के लक्ष्य को अच्छी तरह समझ पायेंगे। इसके अतिरिक्त, आप सात्विक गुणों में रहकर जीवन शैली कैसी होती है, इसके बारे में जानेंगे।
पाठ्यक्रम की तिथियाँ:13 फ़रवरी से 21 अप्रैल 2026 तक
पाठ्यक्रम का समय: शाम 7:00 बजे से रात 8:15 बजे तक (सोमवार/मंगलवार से शुक्रवार) शाम 5:30 बजे से रात 8:15 बजे तक (शनिवार) पाठ्यक्रम में भाग लेने के लिए आवश्यकताएं:कोई आरम्भिक आवश्यकता नहीं हैं; अपितु, यह सुझाव दिया जाता है कि आप प्रतिदिन कम-से-कम 2 माला हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।
पाठ्यक्रम में प्रवेश:पाठ्यक्रम के लिए पञ्जीकरण करने के लिए, कृपया यहाँ क्लिक करें: पञ्जीकरण लिंक
प्रवेश के बारे में:पाठ्यक्रम के लिए योगदान रु 4,000 है (मात्र सुनने वालों के लिए जिन्हें कोई परीक्षा नहीं देनी: रु 2,000)। कृपया ध्यान दें कि यह योगदान पाठ्यक्रम सामग्री और पाठ्यक्रम चलाने से जुड़े प्रशासनिक खर्चों के लिए है। आप बैंक ट्राँसफर या UPI (भारतीय नागरिकों के लिए) द्वारा योगदान भेज सकते हैं; या ऑनलाइन भुगतान लिन्क पर अन्तर्राष्ट्रीय डेबिट या क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। कृपया ध्यान दें कि यह भुगतान आपको प्रवेश की पुष्टि मिलने के बाद ही किया जाना है। यदि प्रवेश पुष्टि मिलने से पहले भुगतान किया जाता है, तो यह आपके अपने जोखिम पर होगा; और अगर आपको पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलता है तो VIHE भुगतान को वापस देने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
कोर्स का परिचयात्मक वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें
पाठ्यक्रम के उद्देश्य:
VIHE भक्ति-प्रवेश पाठ्यक्रम में सप्ताह में 5 दिन, 1 या 2 घण्टे की कक्षा होती हैं। पाठ्यक्रम में व्याख्यान, कार्यशाला, गृहकार्य और परीक्षा सम्मिलित हैं। इनमें ऑनलाइन जप सत्र और उत्सव भी सम्मिलित हैं।
पाठ्यक्रम की सामग्री::- खुली पुस्तक तथा बन्द पुस्तक परीक्षा
- उपस्थिति (न्यूनतम 75%)
यह कोर्स भक्ति के मन्दिर में प्रवेश करने का द्वार खोलता है, जहाँ भक्ति साधनों के भिन्न-भिन्न कक्ष हैं जैसे श्रवण, जप करना, शास्त्रों का पठन, अर्चाविग्रह की पूजा करना, आदि। मुझे अनुभव हुआ कि भगवान् कृष्ण स्वयं को उन लोगों के सामने प्रकट करते हैं जो निष्ठा से उनके पवित्र नाम का जप करते हैं और भक्तों के संग में प्रतिदिन शास्त्रों को पढ़ते हैं, और यह कि कोई भगवान् कृष्ण को केवल भक्ति के माध्यम से ही समझ सकता है। - भावना वीरमानी (भक्ति-प्रवेश बैच 2023)
सम्पर्क करें:VIHE c/o इस्कॉन गौशाला,
परिक्रमा मार्ग,
रमण रेती, वृन्दावन,
मथुरा ज़िला, 281121,
उ प्र , भारत
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